अधिशासी अधिकारी भोलानाथ पर भ्रष्टाचार के सवाल?
क्या ऐसे ही होता है सरकारी धन का बंदरबांट?
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो, सोनभद्र।
नगर पंचायत पिपरी एक बार फिर भ्रष्टाचार के गहरे दलदल में फंसता दिख रहा है। अधिशासी अधिकारी भोलानाथ कुशवाहा पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपना दल (एस) के प्रदेश महासचिव नंदलाल वर्मा ने रविवार 12 अक्टूबर को खुलकर कहा कि भोलानाथ कुशवाहा अपने चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रखकर निविदाएं जारी कर रहे हैं।
पिपरी सोनभद्र के समाजसेवी नंदलाल वर्मा के अनुसार, निविदाएं चोरी-छिपे उन अखबारों में प्रकाशित की जाती हैं जो पिपरी क्षेत्र में कभी पढ़े ही नहीं जाते, जिससे क्षेत्र के अन्य ठेकेदारों को निविदा की सूचना तक नहीं मिलती और तयशुदा ठेकेदारों को ऊँची दरों पर ठेका आवंटित कर दिया जाता है।
क्या यह पूर्व नियोजित लूट नहीं है?
शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया कि क्या सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों का पैसा इसी तरह कुछ ठेकेदारों और अफसरों की जेब भरने के लिए होता है? बिना पारदर्शिता के जारी हो रही निविदाएं साफ तौर पर भ्रष्टाचार की बू दे रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अधिशासी अधिकारी और कुछ चुनिंदा ठेकेदारों के बीच साठगांठ से कार्यों का आवंटन होता है और फर्जी बिलों व कागजी खानापूर्ति के जरिये लाखों रुपये का सरकारी धन हजम किया जा रहा है।
*जनता और जनप्रतिनिधियों में आक्रोश*
इस पूरे मामले को लेकर पिपरी के स्थानीय नागरिकों और विपक्षी दलों में भारी आक्रोश है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर नगर पंचायत में पारदर्शिता और जवाबदेही कब आएगी?
प्रदेश महासचिव वर्मा ने शासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। “सरकारी धन को लूट का जरिया बना दिया गया है। पिपरी नगर पंचायत में भ्रष्टाचार चरम पर है, और जिम्मेदार अधिकारी खुलेआम मनमानी कर रहे हैं।”
नंदलाल वर्मा, प्रदेश महासचिव, अपना दल (एस)










