सार्वजनिक ज़मीन पर कब्जा बर्दाश्त नहीं होगा: हाईकोर्ट
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में सड़कों और सार्वजनिक स्थलों से अतिक्रमण हटाने का सख्त आदेश दिया है। कोर्ट ने अधिकारियों को अवैध कब्जों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने को कहा है, साथ ही दोषी अफसरों पर आपराधिक और विभागीय कार्यवाही के निर्देश भी दिए हैं।
न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकलपीठ ने कहा कि फुटपाथ सिर्फ पैदल यात्रियों के लिए हैं, इनका व्यावसायिक उपयोग अस्वीकार्य है। कोर्ट ने साफ किया कि सार्वजनिक जगहों पर कब्जे के मामलों में लापरवाह ग्राम प्रधान और लेखपालों के खिलाफ जनता हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर सकती है।
झांसी निवासी मुन्नीलाल की जनहित याचिका पर 24 पेज के फैसले में कोर्ट ने “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाने की बात दोहराई और कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज रास्तों पर कब्जा करने वालों से हर्जाना वसूला जाए।
कोर्ट ने झांसी डीएम को निर्देश दिया है कि वे उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में जांच टीम बनाएं और गलत रिपोर्ट देने वाले लेखपाल पर कार्रवाई करें।
अदालत ने सभी जिलाधिकारियों और उपजिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि 60 दिन के भीतर अगर प्रधान या लेखपाल अतिक्रमण की सूचना नहीं देते, तो उनके खिलाफ कदाचार की कार्रवाई की जाए।
ग्राम प्रधानों को याद दिलाया गया है कि वे ग्राम पंचायत की ज़मीन के संरक्षक हैं और कानून के अनुसार ज़िम्मेदारी निभाना उनकी बाध्यता है।










